क्यूंकि की मैं जीना चाहता हु - हिंदी PDF | Kyunki Mein Jeena Chahta Hu In Hindi PDF Free Download





क्यूंकि की मैं जीना चाहता हु - हिंदी PDF | Kyunki Mein Jeena Chahta Hu In Hindi PDF Free Download



पुस्तक : क्यूंकि की मैं जीना चाहता हु 

लेखक : मैट हेग 

पुस्तक की भाषा : हिंदी 

पृष्ठ : 186 

PDF साइज : 2.50 MB
 




Kyunki Mein Jeena Chahta Hu In Hindi PDF Free Download 


Mujhe vah din yaad hai jab mere puraane roop kee maut huee. mere man mein vichaar aa-ja rahe the. kuchh to galat ho raha tha. par, main samajh nahin pa raha tha ki aakhir vah galat tha kya. aur phir, ek sekand ya usase thoda-sa zyaada samay beeta hoga ki mere dimaag ke andar ajeeb-see sanasanee machane lagee. meree khopadee ke pichhale hisse mein, gardan ke paas hee, anumastishk (seribelam) mein jaivik halachal hone lagee. 

spandan, teevr phadaphadaahat jaisa lagane laga maano koee titalee andar phans gaee ho, saath mein jhunajhunee ka bhee ahasaas hone laga mujhe abhee tak pata nahin tha ki dipreshan ya engjaitee ke kaaran shareer par kis tarah ka prabhaav padata hai. mainne socha ki bas ab main marane vaala hoon. aur mera dil doobane laga. aur phir mein bhee doobane laga. 









Kyunki Mein Jeena Chahta Hu In Hindi पुस्तक का विवरण :



मुझे वह दिन याद है जब मेरे पुराने रूप की मौत हुई। मेरे मन में विचार आ-जा रहे थे। कुछ तो ग़लत हो रहा था। पर, मैं समझ नहीं पा रहा था कि आख़िर वह ग़लत था क्या। और फिर, एक सेकंड या उससे थोड़ा-सा ज़्यादा समय बीता होगा कि मेरे दिमाग के अंदर अजीब-सी सनसनी मचने लगी। मेरी खोपड़ी के पिछले हिस्से में, गर्दन के पास ही, अनुमस्तिष्क (सेरिबेलम) में जैविक हलचल होने लगी। स्पंदन, तीव्र फड़फड़ाहट जैसा लगने लगा मानो कोई तितली अंदर फंस गई हो, साथ में झुनझुनी का भी अहसास होने लगा मुझे अभी तक पता नहीं था कि डिप्रेशन या एंग्जाइटी के कारण शरीर पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है। 

मैंने सोचा कि बस अब मैं मरने वाला हूं। और मेरा दिल डूबने लगा। और फिर में भी डूबने लगा। में तेज़ी से किसी अचेतन भय (क्लॉस्ट्रोफ़ोबिक) और घुटन भरी वास्तविकता में धंसने डूबने लगा और मुझे आधा- सामान्य होने में क़रीब क़रीब एक साल का समय लग गया। उस समय तक मुझे डिप्रेशन की ना तो ठीक-ठीक समझ थी और ना ही इसके बारे में अधिक जानकारी थी, बस इतना मालूम था कि मेरे जन्म के बाद मां इससे थोड़े समय के लिए पीड़ित थीं, और मेरी परदादी ने इसी की वजह से ख़ुदकुशी कर ली थी।




तो, मुझे ऐसा लगता है कि इसका पारिवारिक इतिहास रहा है, लेकिन इसके बारे में मैंने बहुत अधिक विचार नहीं किया था। बहरहाल, मैं चौबीस साल का था और स्पेन में इबिज़ा द्वीप के एक शांत और सुंदर स्थान पर रहता था। सितंबर का महीना था। छह सालों के विद्यार्थी जीवन और समर जॉब्स के बाद, एक पखवाड़े के भीतर मुझे लंदन वापस लौटना था। और वास्तविकता का सामना करना था। मैं यथासंभव वयस्क होना टालता जा रहा था, लेकिन अब यह डरावने बादल की शक्ल के रूप में मुझ पर घिर आया था। एक ऐसा बादल जो अब फट कर मुझ पर बरसने लगा था।



दिमाग के बारे में विचित्र बात यह है कि इसके भीतर होने वाली प्रचंड उथल-पुथल को आपके अलावा कोई नहीं देख सकता। दुनिया कंधे उचका कर आगे बढ़ जाती है, मानो कुछ हुआ ही नहीं हो आपकी पुतलियां फैल सकती हैं। आप बेतुकी बातें कर सकते हैं। आपकी त्वचा पर पसीना छलक सकता है। ऐसा कोई रास्ता नहीं था कि विला में रहने वाला कोई भी व्यक्ति यह जान पाए कि मैं क्या महसूस कर रहा हूं, मैं किस नर्क में जी रहा था, या मौत का विचार आखिर मुझे इतना अद्भुत क्यों लग रहा था उसे ठीक-ठीक समझ पाने का भी उनके पास कोई तरीक़ा नहीं था।

मैं तीन दिनों तक बिस्तर पर पड़ा रहा। लेकिन में सोया नहीं था। मेरी प्रेमिका एंड्रिया नियमित अंतराल पर पानी लेकर आती रही, या फल देती थी जिन्हें मैं बड़ी मुश्किल से खा पाता था। खिड़की खुली थी ताकि ताज़ा हवा अंदर आ सके, लेकिन कमरा गर्म था और उसमें सन्नाटा पसरा था। मुझे याद है कि मैं इस बात पर हैरान था कि मैं ज़िंदा कैसे हूं। मैं जानता हूं कि यह बात अतिनाटकीय लग सकती है, डिप्रेशन और एंग्जाइटी आपके भीतर अतिनाटकीय विचारों को ही जन्म देते हैं। बहरहाल, मुझे कोई राहत नहीं थी। 

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Book Description In English :

I remember the day my old self died. Thoughts were coming and going in my mind. Something was going wrong. But, I could not understand what was wrong with him. And then, a second or a little more must have passed when a strange sensation began to rise inside my brain. At the back of my skull, near the neck, the cerebellum began to stir biologically. Throbbing, intense fluttering feeling like a butterfly being trapped inside, accompanied by a tingling sensation. I still didn't know how depression or anxiety affected the body.

I thought that I am going to die now. And my heart started sinking. And then I started sinking too. I quickly began to sink into an unconscious (claustrophobic) and suffocating reality, and it took me almost a year to be even half-normal. Up to that time, I didn't understand or know much about depression, except that my mother suffered from it for a short time after I was born, and that my great-grandmother committed suicide because of it. 





 

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