रामप्रशाद बिस्मिल आत्मकथा - हिंदी PDF | Ramprashad Bismil Autobiography In Hindi PDF Free Download

 



रामप्रशाद बिस्मिल आत्मकथा - हिंदी PDF | Ramprashad Bismil Autobiography In Hindi PDF Free Download


स्तक : रामप्रशाद बिस्मिल आत्मकथा

 

लेखक : रामप्रशाद बिस्मिल 


पुस्तक की भाषा : हिंदी 


पृष्ठ : 130


PDF साइज :  5 MB






Ramprashad Bismil Autobiography In Hindi PDF Free Download 




Shaheed raamaprasaad bismil bhaarat ke poornakaadhikaaree aandolan ke agranee neta va sangathanakarta the. yahee nahin balki vismit vejod raashtreey kavi, lekhak va saphal anuvaadak bhee the ! raamaprasaad bismil kee kraantikaaree kaarravaiyon kee tarah unakee saahityik krtiyon ne svatantrata premiyon ko sangharsh va balidaan ke maarg par agrasar kiya svatantrataapremee jan sabhaon, jelon kee bairakon aur phaansee kee kothariyon mein vismit kee sangharsh va balidaan kee bhaavanaon se otaprot kavitaen aur nazmen gaate the. yah pustak isee kraantiveer raamaprasaad vismil kee aatmakatha hai.

Ise padhakar aaj bhee hamaare pyaare desh ke svaadheenata sangraam mein kie gae validaanon kee yaad taaza ho jaatee hai raamaprasaad vismit ne yah aatmakatha gorakhapur jel mein 19 disambar san 1927 ko huee apanee phaushee se do din poorv atyant kathin paristhitiyon mein likhakar samaapt kee thee banaaraseedaas chaturvedee ne likha hai "raamaprasaad vismit ka aatmacharitr hindee ka sarvashreshth aatmacharitr hai. jin paristhitiyon mein vah likha gaya tha, unake beech mein se gujarane ka mauka laakhon mein se ekaadh ko hee mil sakata hai."












RamPrashad Bismil Atamkatha In Hindi पुस्तक का विवरण :




शहीद रामप्रसाद बिस्मिल भारत के पूर्णकाधिकारी आंदोलन के अग्रणी नेता व संगठनकर्ता थे। यही नहीं बल्कि विस्मित वेजोड़ राष्ट्रीय कवि, लेखक व सफल अनुवादक भी थे ! रामप्रसाद बिस्मिल की क्रांतिकारी कार्रवाइयों की तरह उनकी साहित्यिक कृतियों ने स्वतंत्रता प्रेमियों को संघर्ष व बलिदान के मार्ग पर अग्रसर किया स्वतंत्रताप्रेमी जन सभाओं, जेलों की बैरकों और फाँसी की कोठरियों में विस्मित की संघर्ष व बलिदान की भावनाओं से ओतप्रोत कविताएँ और नज़्में गाते थे। यह पुस्तक इसी क्रांतिवीर रामप्रसाद विस्मिल की आत्मकथा है। 

इसे पढ़कर आज भी हमारे प्यारे देश के स्वाधीनता संग्राम में किए गए वलिदानों की याद ताज़ा हो जाती है रामप्रसाद विस्मित ने यह आत्मकथा गोरखपुर जेल में 19 दिसंबर सन् 1927 को हुई अपनी फौशी से दो दिन पूर्व अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लिखकर समाप्त की थी बनारसीदास चतुर्वेदी ने लिखा है "रामप्रसाद विस्मित का आत्मचरित्र हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ आत्मचरित्र है। जिन परिस्थितियों में वह लिखा गया था, उनके बीच में से गुजरने का मौका लाखों में से एकाध को ही मिल सकता है।"



विस्मिल ने अपनी यह आत्मकथा रजिस्टर के साइज के कागजों पर पेंसिल से लिखकर तीन खेपों में न जाने किस प्रकार गुप्त रूप से गोरखपुर के सुप्रसिद्ध कांग्रेसी नेता दशस्य प्रसाद द्विवेदी को भिजवाई थी। अंतिम खेप तो फाँसी से एक दिन पूर्व ही द्विवेदीजी के पास पहुँची थी द्विवेदीजी ने इसे गणेश शंकर विद्यार्थी को दिया था। विद्यार्थीजी ने इस आत्मकथा को 'काकोरी के शहीद' नामक पुस्तक के प्रारंभ में प्रकाशित कराया था। यह आत्मकथा ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण कृति है। 



इसमें रामप्रसाद विस्मिल के अभाव - प्रस्त पारिवारिक जीवन, उनके सपरित्र, देशप्रेम व बलिदान की भावना तथा आम आदमी के सुख व समृद्धि की उनकी उत्कट अभिलाषा की जानकारी तो मिलती ही है, इसमें देश के क्रांतिकारी आंदोलन, उसको विचारमारा, शक्ति और कमजोरियों पर भी प्रकाश पड़ता है। इस आत्मकथा में विस्मित स्वाधीनता संग्राम में सशस्त्र क्रांतिकारी संघर्ष के योगदान को महत्वपूर्ण


मानते हैं। परंतु वह अपने अध्ययन और अनुभवों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि युवकों को आतंक और व्यक्तिगत हत्याओं का मार्ग छोड़कर सुले जन आंदोलन में शामिल होना चाहिए। वह युवकों मजदूरों व किसानों को संगठित करके उन्हें आज़ादी की लड़ाई में उतारने और सच्चे समाजवाद की विचारधारा को अपनाने की सलाह देते हैं। रामप्रसाद विस्मिल और उनके परिवार ने गरीवी का जीवन विताया था और देश की गरीब व अशिक्षित जनता की पीड़ा को निकट से देखा था। 

वास्तव में वह इसी गरीब जनता और देशप्रेमी युवकों के सच्चे प्रतिनिधि थे अनेक अन्य क्रांतिकारियों व स्वाधीनता सेनानियों की तरह वह यही चाहते थे कि स्वतंत्र भारत में जनता को गरीबी और शोषण से मुक्त कराया जाए।  यही उनका सपना था। उनके सपने और संकल्प को पूरा करना ही आज हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है। इसके अतिरिक्त रामप्रसाद विस्मित्त हिन्दू मुसलमान, सिख, ईसाई सभी धनों संप्रदायों और जातियों में एकता चाहते थे। इस पुस्तक में शहीद रामप्रसाद विस्मिल की आत्मकथा मूल रूप में दी गई है। 



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Description of the book In English :




Shaheed Ramprasad Bismil was the leading leader and organizer of the full rights movement of India. Not only this, but astonished Vejod was also a national poet, writer and successful translator. Like the revolutionary actions of Ramprasad Bismil, his literary works led the freedom lovers on the path of struggle and sacrifice. Freedom lovers used to sing poems and songs filled with the spirit of struggle and sacrifice of awe in public meetings, barracks of jails and hanging cells. This book is the autobiography of this Krantiveer Ramprasad Bismil.

Reading this, even today the memory of the sacrifices made in the freedom struggle of our beloved country is refreshed. Has written, "The autobiography of Ramprasad Bismit is the best self-character in Hindi. In the circumstances in which it was written, only a few out of a million can get a chance to pass through them."








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