MAN KKYA HAIN BY J. KRISHNAMURTI PDF DOWNLOAD







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पुस्तक /book : मन  क्या हैं ? 


लेखक / author : जे. कृष्णमूर्ति 


पुस्तक की भाषा / language : हिंदी 


पृष्ठ / page : 70 


 PDF साइज / size : 1 MB 







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Manuṣhya jāti kī pūrī kahānī āpamean hai. vyāpak anubhava, gaharāī tak jad pakade hue bhaya, duntiāe, duahkha, sukha-āsakti aur yugoan-yugoan se sanchit tamām mata-vishvās āp vah kitāb hai, aur us kitāb ko paḍhanā ek kalā hai। use kisī prakāshak ne nahīan chhāpā hai। vah bechane ke lie nahīan hai.
Āp use kahīan kharīd nahīan sakate। āp kisī vishleṣhak ke pās nahīan jā sakate kyoanki usakī kitāb bhī āpake hī jaisī hai n hī kisī vaijnyānik ke pās jāne kā kuchh matalab hai; usake pās bhale hī padārtha evan khagol vijnyān ke bāre mean ḍheroan jānakāriyā hoan, lekin mānavatā kī kahānī vālī usakī kitāb to vaisī hī hai jaisī āpakī।

Yadi āp baḍae dhyān se, dhīraj ke sātha, zizak ke sāth is kitāb ko nahīan paḍha़te, to āp us samāj ko kabhī nahīan badal pāege jisamean āp rahate haian, vah samāj jo bhraṣhṭa hai, anaitik hai, jisamean beintahā garībī, anyāya aur aisī hī anya samasyāe haian.





MAN KKYA HAIN BY J. KRISHNAMURTI PDF पुस्तक का  विवरण : 

मनुष्य जाति की पूरी कहानी आपमें है। व्यापक अनुभव, गहराई तक जड़ पकड़े हुए भय, दुन्तिाएँ, दुःख, सुख-आसक्ति और युगों-युगों से संचित तमाम मत-विश्वास आप वह किताब है, और उस किताब को पढ़ना एक कला है। उसे किसी प्रकाशक ने नहीं छापा है। वह बेचने के लिए नहीं है। 
आप उसे कहीं खरीद नहीं सकते। आप किसी विश्लेषक के पास नहीं जा सकते क्योंकि उसकी किताब भी आपके ही जैसी है न ही किसी वैज्ञानिक के पास जाने का कुछ मतलब है; उसके पास भले ही पदार्थ एवं खगोल विज्ञान के बारे में ढेरों जानकारियाँ हों, लेकिन मानवता की कहानी वाली उसकी किताब तो वैसी ही है जैसी आपकी।

यदि आप बड़े ध्यान से, धीरज के साथ, झिझक के साथ इस किताब को नहीं पढ़ते, तो आप उस समाज को कभी नहीं बदल पाएँगे जिसमें आप रहते हैं, वह समाज जो भ्रष्ट है, अनैतिक है, जिसमें बेइन्तहा गरीबी, अन्याय और ऐसी ही अन्य समस्याएँ हैं।

 किसी भी संजीदा मनुष्य का सरोकार होंगे वर्तमान संसार के ये मौजूदा हालात-अराजकता, भ्रष्टाचार, और युद्ध, जिससे बड़ा कोई अपराध नहीं और इस समाज और उसके ढाँचे में आधारभूत परिवर्तन लाने के लिए आपको सक्षम होना होगा यह किताब पढ़ने में जो कि आप खुद हैं। हममें से हरएक ने इस समाज को बनाया है, हमने हमारे माता-पि दादा परदादा ने, सबने। सभी मनुष्य प्राणियों ने इस समाज को रचा है, और जब तक इस समाज में बदलाव नहीं आता, तब तक इसमें अधिकाधिक विकृति आती रहेगी, युद्ध होते रहेंगे व मानव मन का अधिकाधिक पतन होता जाएगा। यह एक तथ्य है।




तो इस किताब को पढ़ने के लिए, जो कि आप खुद हैं, आपके पास सुनने की कला का होना ज़रूरी है, तभी आप जान पाएंगे कि किताब कह क्या रही है। उसे सुनने का अर्थ है किताब जो कुछ कह रही है उसकी व्याख्या में न उलझते हुए आपको उसे ठीक वैसे देखना है जैसे आप किसी बादल को देखते हैं। बादल के बारे में आप कुछ नहीं कर सकते हैं, ऐसे ही जैसे हवा में झूमते ताड़-पत्तों और सूर्यास्त की सुन्दरता के सन्दर्भ में आप कुछ नहीं कर सकते। आप न तो उसमें संशोधन कर सकते हैं, न ही उससे

वाद-विवाद कर सकते हैं और न उसे बदल सकते हैं; वह तो जो है सो है। तो किताब क्या कह रही है यह जानने के लिए आपमें सुनने की कला का होना बेहद जरूरी है। आप ही वह किताब है, आप किताब से यह नहीं कह सकते कि उसे क्या उद्घाटित करना चाहिए वह तो सब कुछ प्रकट कर देगी। तो सबसे पहली कला जो हमें आनी चाहिए वह है : सुनने की कला । 

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Description of the book In English :

The whole story of mankind is in you. Extensive experience, deeply rooted fears, sorrows, sorrows, pleasure-attachments and all the beliefs and beliefs accumulated over the ages are you that book, and reading that book is an art. It has not been published by any publisher. It's not for sale.

You can't buy it anywhere. You cannot go to an analyst because his book is also like yours, nor is there any point in going to a scientist; He may have a lot of knowledge about matter and astronomy, but his book on the story of humanity is as good as yours. If you do not read this book very carefully, patiently, with hesitation, you will never be able to change the society you live in, a society that is corrupt, immoral, with extreme poverty, injustice and so on. There are other problems.

 


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